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       Jharkhand Board Class 8 civics Notes | संविधान  

  JAC Board Solution For Class 8TH (Social Science) civics Chapter 1


□ आइए जानें:
प्रश्न 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए―
(i) किसी व्यक्ति को उसके जन्म से मिलने वाले अधिकार .......
कहलाते हैं।
(ii) शिक्षा ................... सूची का विषय है।
(iii) ..............समिति की रिपोर्ट के आधार पर संविधान में मूल
कर्तव्य शामिल किए गए हैं।
(iv) संविधान के भाग ................ में मौलिक अधिकारों का वर्णन
किया गया है।
उत्तर―(i) मानवाधिकार   (ii) समवर्ती   (iii) स्वर्ण सिंह
(iv) 3 में अनुच्छेद 12 से 30 तक एवं 32 से 35

प्रश्न 2. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए―
(i) सविधान में वर्णित किन्हीं पाँच मौलिक कर्तव्यों को लिखिए।
उत्तर―संविधान में वर्णित पाँच मौलिक कर्तव्य निम्न हैं–
(क) संविधान का पालन और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज
और राष्ट्रगान का आदर करना चाहिए।

(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले
उच्च आदर्शों को अपनाना चाहिए।

(ग) भारत की संप्रभुता, एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाए
रखना चाहिए।

(घ) देश की रक्षा और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करनी
चाहिए।

(ङ) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना चाहिए।

(ii) भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त तीन मौलिक अधिकारों को
लिखिए।
उत्तर― भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के प्रमुख तीन मौलिक
अधिकार निम्न हैं―
(क) समानता का अधिकार
(ख) स्वतंत्रता का अधिकार
(ग) शोषण के विरूद्ध अधिकार

(iii) 'शिक्षा का अधिकार' से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर― 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और
अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का 2009 में पारित और 2010 में लागू कानून
शिक्षा का अधिकार कानून है।

(iv) मानवाधिकार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर― व्यक्ति को जन्म से प्राप्त होनेवाले सामाजिक, आर्थिक
अथवा राजनीतिक अधिकारों को मानवाधिकार कहते हैं।

(v) 'धर्मनिरपेक्षता' शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर― धर्म निरपेक्षता का शाब्दिक अर्थ है- धर्म के प्रति निरपेक्ष
भाव का होना। अर्थात् राज्य धार्मिक मामले में तटस्थ रहेगा। धर्म को राज्य
से अलग रखने की अवधारणा को ही धर्मनिरपेक्षता कहते हैं।

□ आइए चर्चा करें:
प्रश्न 3. 'भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।' कैसे?
उत्तर― भारत का संविधान भारत को एक धर्म-निरपक्ष राष्ट्र घोषित
करता है। इस प्रकार संविधान ने धर्म को राज्य से अलग रखा है। भारतीय
राज्य की बागडोर न तो किसी एक धार्मिक समूह के हाथों में है और न
ही राज्य किसी एक धर्म विशेष को समर्थन देता है। नागरिकों को धार्मिक
स्वतंत्रता दी गई है। धार्मिक आधार पर कोई किसी को दबा नहा सकता।
राज्य किसी नागरिक पर कोई खास धर्म नहीं थोप सकता है। इस प्रकार
स्पष्ट है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।

प्रश्न 4. मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्त्तव्य में क्या अंतर है।
उत्तर― मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्त्तव्य में निम्न अंतर है―
मौलिक अधिकार                                मौलिक कर्त्तव्य
(i) नागरिकों के विकास के लिए        (i) नागरिकों के लिए संविधान द्वारा
संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों               बताए गए कर्त्तव्यों को ही
को मौलिक अधिकार कहते                   मौलिक कर्त्तव्य कहते हैं।
हैं।
(ii) यह नागरिकों को नागरिकों         (ii) यह देश की एकता और अखंडता
तथा सरकारों की मनमानी                      को अक्षुण्ण बनाये रखने में
आर निरंकुशता से बचाता है।                  मदद करता है।
(iii) इसकी संख्या 6 है।                  (iii) इनकी संख्या 11 है।

प्रश्न 5.भारत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका लिए
संविधान में किए गए प्रावधानों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर― भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका के लिए संविधान
में निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं―
(क) उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के जजों की नियुक्ति
राष्ट्रपति करता है, लेकिन उन्हें पदमुक्त करने का अधिकार राष्ट्रपति के
पास नहीं है। उसे केवल महाभियोग द्वारा ही हटाया जा सकता है।

(ख) उच्चतम या उच्च न्यायालय के अधीन कर्मचारियों की नियुक्ति
तथा उनकी सेवा शर्त आदि के निर्धारण का अधिकार संबंधित न्यायालय
को होता है। सरकार या संसद इस विषय पर हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

(ग) न्यायाधीश पदमुक्त होने के पश्चात् कोई सरकारी पद ग्रहण नहीं
कर सकता और न ही अधीनस्थ न्यायालय में वकालत कर सकता है।

(घ) न्यायाधीशों व अन्य कर्मचारियों का वेतन संचित निधि से देय
होता है, लेकिन संसद इस विषय पर मतदान नहीं कर सकती है।

प्रश्न 6. 'एक लोकतांत्रिक देश में मौलिक अधिकार का होना
बहुत जरूरी है।' क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर के
पक्ष में तीन तर्क दीजिए।
उत्तर― एक लोकतांत्रिक देश में मौलिक अधिकार का होना बहुत
जरूरी है। मैं इस कथन से बिल्कुल सहमत हूँ, क्योंकि–
(i) स्वतंत्रता के बिना अपना स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय लेना असंभव
है। इसके बिना लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता है।

(ii) मौलिक अधिकार लोकतंत्र का आधार है, इसके अलावा में न
नागरिकों का विकास संभव है और न ही सरकार पर नियंत्रण रखा जा
सकता है।

(iii) समानता के अधिकार से ही सही और जनसमर्थित बहुमत का
निर्माण हो सकता है, जो लोकतंत्र का आधार है।

प्रश्न 7. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को क्यों शामिल
किया गया ? किन्हीं तीन कारणों की चर्चा कीजिए।
उत्तर― भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति
के रिपोर्ट के आधार पर 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा भाग 4 (क)
में जोड़ा गया है, इसके निम्न कारण थे–
(i) नागरिकों द्वारा राष्ट्रीय एकता व अखण्डता को खतरा ।

(ii) राष्ट्र, राष्ट्रीय सम्पत्ति, प्राकृतिक पर्यावरण आदि को नुकसान
पहुँचाना।

(iii) संविधान, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान आदि के प्रति आदर और गौरव का
भाव बढ़ाना।

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