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   Jharkhand Board Class 8  Hindi  Notes | अपराजिता  

      JAC Board Solution For Class 8TH Hindi Chapter 16


पाठ परिचय : प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने एक ऐसी दिव्यांग महिला से
परिचय कराया है जिसमें असीम धैर्य, दृढ़ इच्छा शक्ति और अद्भुत लगन है।
अपनी विकलांगता पर विजय प्राप्त कर वह सफलता के चरमोत्कर्ष पर जा
पहुँचती है। विषम एवं विकट परिस्थितियों और चुनौतियों का साहसपूर्ण तरीके
से सामना करने के लिए अपराजिता सदैव तैयार रहती है। उसके पीछे उसकी
माँ का सहारा है जो स्वयं दृढनिश्चयी, संघर्षशील, साहसी तथा ममतामयी हैं।
वह अपनी दिव्यांग पुत्री के साथ सदैव साये की तरह मौजूद रहती है। इस
प्रकार अनुकूल वातावरण तैयार कर वह माँ अपनी बेटी की योग्यता सिद्ध कर
देती है।
          लेखक परिचय : 'अपराजिता' शिवानी द्वारा लिखी रचना है। उनका
जन्म गुजरात के राजकोट में 1933 ई० में हुआ था। ये हिन्दी की सुप्रसिद्ध
लेखिका हैं। इन्होंने प्रारंभिक स्नातक उत्तीर्ण किया। इन्हें पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त
हुआ। इनकी प्रमुख रचनाओं में-कृष्ण कली, चौदह फेरे, भैरवी, शमशान,
चम्पा आदि प्रमुख है।

                                          अभ्यास प्रश्न

                                            □ पाठ से:

1. डॉ० चंद्रा से पहली बार मिलकर लेखिका ने क्या अनुभव
किया?
उत्तर―डॉ० चन्द्रा से पहली बार मिलकर लेखिका को लगा कि विलक्षण
व्यक्तित्व से मुलाकात हुई है। उसकी कहानी सुनकर वह दंग रह गई। लेखिका
ने अनुभव किया कि― नियति के प्रत्येक कठोर आघात को अति मानवीय
धैर्य एवं साहस से झेलती लड़की किसी देवांगना से कम नहीं थी।

2. लेखिका को डॉ० चन्द्रा देवांगना सी क्यों लगी?
उत्तर― डॉ० चंद्रा नियति के क्रूर मजाक को भी झुठलाकर महत्वाकांक्षायुक्त
जीवन जी रही थी। इसलिए उसे देवांगना-सी लगी।

3. वीर जननी का पुरस्कार किसे मिला ? उसे यह पुरस्कार क्यों
दिया गया?
उत्तर― 'वीर जननी' का पुरस्कार जे० सी० बंगलौर ने डॉ. चंद्रा की
माता श्रीमती शारदा सुब्रह्मण्यम् को दिया। यह पुरस्कार उन्हें अपनी पुत्री के
लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने एवं साथ देने के कारण दिया गया।

4. अपराजिता अपने नाम को किस प्रकार सार्थक करती है ?
उत्तर―अपराजिता का अर्थ है जो पराजित कभी न हो। डॉ. चंद्रा विधाता
प्रदत्त विकलांगता को भी मात देकर जीवन के सर्वोच्च स्थान को प्राप्त कर
लिया। इसीलिए उसका अपराजिता नाम सार्थक है।

5. 'चिकित्सा ने जो खोया है, वह विज्ञान ने पाया।' उपरोक्त पंक्ति
को पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
उत्तर―परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर भी अपराजिता को
मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला क्योंकि उसका निचला शरीर निर्जीव था जो
शल्य चिकित्सा के उपयुक्त नहीं था। किन्तु डॉ० चन्द्रा ने विज्ञान में डॉक्टरेट
की उपाधि प्राप्त की। इसी पर यह कथन है कि जो चिकित्सा की डॉ० न
बनी वह विज्ञान की डॉ० बन गई।

6. लेखिका ने लखनऊ के मेधावी युवक को डॉ० चंद्रा से किस
प्रकार की प्रेरणा लेने की बात कही है ?
उत्तर―लखनऊ के मेधावी युवक का ट्रेन से हाथ कट गया। वह हताश
हो नशे की गिरफ्त में आया। धीरे-धीरे वह पागल हो गया। अब वह लखनऊ
के नूर मंजिल पागल खाने में इलाजरत है। लेखिका ऐसे हताश लोगों का कह
रही है कि डॉ० चंद्रा जैसे विकलांग लोगों से ऐसे युवकों को प्रेरणा लेनी
चाहिए।

7. लेखिका ने डॉ० चंद्रा की कार्यकुशलता को सुदीर्घ कठिन
अभ्यास की यातनाप्रद भूमिका कहा है । लेखिका ने ऐसा क्यों कहा
है?
उत्तर―जब अपराजिता (डॉ० चन्द्रा) ने डॉक्टरेट की तब उसने लेखिका
को कहा उसकी सफलता के पीछे उसकी माँ के कठिन अभ्यास की यातनाप्रद
भूमिका थी जो अपराजिता को विज्ञान का सर्वोच्च पुरस्कार तक खींच लाया।
अर्थात् अपराजिता की माँ न अपना सर्वस्व न्योछावर कर उसके साथ लगी
रही।

                                                ★★★

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