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    Jharkhand Board Class 8  Hindi  Notes | गुरू-शिष्य  

     JAC Board Solution For Class 8TH Hindi Chapter 15


पाठ परिचय : प्रस्तुत पाठ लेखक को संस्मरण 'व्योमकेश दरवेश' का
एक अंश है। इसमें एक जिज्ञासु शिष्य और विशाल हृदय गुरू के प्रथम संपर्क
का वर्णन है। लेखक ने अपने गुरू आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्य
स्मरण किया है। इसी स्मरण में उनके व्यक्तित्व, वेशभूषा आदि का भी वर्णन
किया है।
          लेखक परिचय : विश्वनाथ त्रिपाठी का जन्म 16 फरवरी, 1932 ई०
को सिद्धार्थ नगर के वस्ती में (उ०प्र०) हुआ था। ये हिन्दी के वरिष्ठ
आलोचक, कवि और गद्यकार थे। इन्हें कई सम्मान भी प्राप्त हुए जिसमें व्यास
सम्मान, हिन्दी अकादमी का साहित्यकार सम्मान, मूर्ति देवी सम्मान आदि
प्रमुख हैं। इनकी प्रमुख कृतियों में कुछ विचार, हिन्दी आलोचना, देश के
इस दौर में, जैसा कह सका, व्योमकेश दरवेश, नंगा तलाई का गाँव आदि
प्रमुख है।

                                    अभ्यास प्रश्न

                                      □ पाठ से:

1. पाठ में विद्यार्थी की जो वेश-भूषा है इससे उस विद्यार्थी के बारे
में क्या परिलक्षित होता है?
उत्तर―विद्यार्थी की वेशभूषा से लगता है कि वह असहाय है एवं
द्विवेदी जी के पास सहायतार्थ आया है। वह जिज्ञासु एवं ज्ञान पिपासु भी है।
वह द्विवेदी जी का शिष्यत्व ग्रहणकर जीवन को धन्य बनाना चाहता है।

2. काशी विश्वविद्यालय का वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर― काशी विश्वविद्यालय का काफी क्षेत्र खाली था। सर्वत्र वृक्षों की
सुन्दर श्रृंखला थी। विद्यालय के प्रवेश स्थल के बाई तरफ महिला विद्यालय
था। दाई तरफ सर सुंदरलाल अस्पताल था। वहाँ का वातावरण अत्यंत ही नीरव
एवं शांत था।

3. लेखक ने बनारस के आस-पास की ग्रामीण औरतों का चित्रण
किस प्रकार किया है? वहाँ के परिवेश और आपके परिवेश में क्या
अंतर है?
उत्तर― बनारस के आस-पास की ग्रामीण औरतें लाल कत्थई रंग की
साड़ियाँ बहुत पहनती हैं। वे घास काटती. घास का गट्ठर सर पर रखे, सड़क
के किनारे काम करती हुई अक्सर दिखलाई पड़ती हैं। वे साथ रहती हैं तो
चुप नहीं रहती हैं। गीत गाती हैं, बातें करती हैं या झगड़ती हैं।
       वहाँ के परिवेश और हमारे परिवेश में यही अंतर है कि हमारे यहाँ गुस्सा
आने पर लोग चुप रहते हैं, न बोलते हैं- अर्थात् हम शरारती प्रवृत्ति के लोग हैं।

4. लेखक फर्श पर ही क्यों बैठ गया ?
उत्तर― सम्भावना भावना एवं संग्राम के कारण लेखक बरामदे में बने
सीमेंट के आसनों पर नहीं बैठा। फर्श साफ-सुथरा था। अतः लेखक फर्श पर
ही बैठ गया।

5. लेखक कानपुर से शर्म के मारे क्यों भाग आया था ?
उत्तर― लेखक को 3 अंकों से फर्स्ट क्लास छूट गया था। कॉलेज में
अध्यापक आशा करते थे कि लेखक युनिवर्सिटी में टॉप करेगा। किन्तु उसे
प्रथम श्रेणी भी नहीं प्राप्त हुई। इस कारण वह शर्म के मारे कानपुर से भाग
कर बनारस युनिवर्सिटी पढ़ने के लिए आया।

6. सप्रसंग व्याख्या करें- जब तुम मेरे शिष्य हो तो गुरू-शिष्य से
बढ़कर आत्मीय संबंध और कौन होता है ? विद्यार्थी को मधुकरी वृत्ति का
होना चाहिए। जहाँ से भी हो ज्ञान ग्रहण करना चाहिए?
उत्तर― प्रस्तुत पंक्तियाँ 'गुरू शिष्य' पाठ से ली गई है। इसके लेखक
विश्वनाथ त्रिपाठी हैं।
      यहाँ लेखक आचार्य हजारी प्र० द्विवेदी से शिष्यत्व ग्रहण करना चाहता
है। तब द्विवेदी जी के पूछने पर कि आर्थिक कष्ट भी है क्या? तब लेखक
कहता है मैं प्रबंध कर लूँगा। इसपर द्विवेदी जी की यह उक्ति है कि गुरू शिष्य
में बड़ा आत्मीय संबंध होता है। शिष्य को मधुमक्खी के अनुसार होना चाहिए
जहाँ रस हो ग्रहण कर ले एवं मधु बनाए। उसी तरह ज्ञान कहीं से भी लेकर
ग्रहण करने का गुण विद्यार्थी में होना चाहिए।

                             □  पाठ से आगे :

1. आपको अपने शुभचिंतकों का मार्गदर्शन अवश्य मिला होगा।
किसी एक शुभचिंतक के बारे में लिखिए।
उत्तर― स्वयं करें।

2. किसी पर अंध-श्रद्धा करना ही है गलत । तर्क देते हुए बताइए।
उत्तर― किसी पर भी अंध श्रद्धा नहीं करनी चाहिए। अंध श्रद्धा हमें
धोखा प्रदान करती है। बहुधा हम आँख मूँद कर जब भरोसा करने लगते हैं
तब हमें सामने वाला मूर्ख समझने लगता है एवं धोखा देकर चला जाता है।

                                               ★★★

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