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   Jharkhand Board Class 8 Geography Notes | कृषि  

    JAC Board Solution For Class 8TH (Social Science) Geography Chapter 4


प्रश्न 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) कृषि एक ............ क्रिया है।
(ख) भारत की कुल भूमि का........... प्रतिशत कृषि योग्य है।
(ग) स्थानांतरी कृषि को उत्तर-पूर्वी भारत में ............ खेती करते हैं।
(घ) चाय, कॉफी, रबर ............. कृषि की फसलें हैं।
(ङ) चावल का सबसे बड़ा उत्पादक देश ..............है।
(च) ........... को सफेद सोना तथा ............. को सुनहरा रेशा कहा
जाता है।
(छ) ............. को विश्व का कॉफी कटोरा भी कहा जाता है।
उत्तर― (क) प्राथमिक  (ख) 57   (ग) झूम  (घ) रोपण/वाणिज्यिक
(ङ) चीन   (च) कपास, जूट या पटसन   (छ) ब्राजील

प्रश्न 2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(क) आर्थिक क्रियाएँ कितने प्रकार की होती हैं ? नाम लिखिए।
उत्तर― आर्थिक क्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं―(i) प्राथमिक आर्थिक
क्रियाएँ, (ii) द्वितीयक आर्थिक क्रियाएँ तथा (iii) तृतीयक क्रियाएँ ।

(ख) प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक आर्थिक क्रियाओं के
क-एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर―प्राथमिक आर्थिक क्रिया है– कृषि
द्वितीयक आर्थिक क्रिया है – उद्योग
तृतीयक आर्थिक क्रिया है – सेवा

(ग) कृषिगत भूमि क्या है ?
उत्तर―ऐसी भूमि जिस पर खेती का कार्य किया जा सकता है।
कृषिगत भूमि अथवा कृषि योग्य भूमि कहलाता है।

(घ) चलवासी पशुचारण भारत के किस राज्य में होता है ?
उत्तर― लवासी पशुचारण भारत के राजस्थान और जम्मू और
कश्मीर राज्यों में होता है।

(ङ) किस प्रकार की कृषि में फसल का उत्पादन बाजार में
बेचने के लिए किया जाता है?
उत्तर―वाणिज्यिक कृषि में फसल का उत्पादन बाजार में बेचने के
लिए किया जाता है।

(च) जूट के मुख्य उत्पादक देश कौन-कौन से हैं ?
उत्तर―जूट के मुख्य उत्पादक देश भारत, बांग्लादेश, चीन, उज्बेकिस्तान,
नेपाल, म्यांमार तथा वियतनाम है।

प्रश्न 2. लघु उत्तरीय प्रश्न–
(क) कृषि से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर―कृषि शब्द अंग्रेजी के Agriculture का पर्याय है, जिसका
शाब्दिक अर्थ है भूमि या खेत में कार्य कर कुछ उपजाना है। बीज,
उर्वरक, मशीन, श्रमिक आदि इसके निवेश हैं। जुताई-बुआई, सिंचाई,
निराई, कटाई आदि इसकी प्रमुख संक्रियाएँ हैं। फसल इसकी निर्गत या
उत्पाद है।

(ख) निर्वाह-कृषि और वाणिज्यिक कृषि में अन्तर स्पष्ट
कीजिए।
उत्तर―निर्वाह-कृषि और वाणिज्यिक कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-
निर्वाह-कृषि–
(i) निर्वाह-कृषि में खेतों में घर के लोगों की सहायता से जीवन
निर्वहण के लिए फसलें उगाई जाती है।
(ii) इस प्रकार की खेती सघन आबादी वाले क्षेत्रों में की जाती है।
(iii) इस कृषि में अधिकतर कार्य हल अथवा पशु श्रम से किये जाते
है।
(iv) इसमें उत्पादन की मात्रा कम होती है।

वाणिज्यिक कृषि–
(i) वाणिज्यिक कृषि में खेतों में मजदूरों और यंत्रों की सहायता से
बाजार में बेचने के लिए फसलें उगाई जाती है।
(ii) इस प्रकार की खेती विरल आबादी वाले क्षेत्रों में की जाती है।
(iii) इस कृषि में अधिकतर कार्य यंत्रों और मशीनों से किए जाते हैं।
(iv) इसमें उत्पादन की मात्रा अधिक होती है।

(ग) भारत में गहन निर्वाह-कृषि क्यों प्रचलित हैं ?
उत्तर―गहन निर्वाह-कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ संघन
आबादी मिलती है और कृषि भूमि की उपलब्धता कम रहती है। भारत एक
सघन आबाद का देश है। यहाँ कृषि जोतों का आकार भी काफी छोटा है।
अधिक मानव श्रम उपलब्ध है। अधिक उत्पादन के लिए मशीनों, उर्वरकों,
सिंचाई, उच्च उपजी किस्म के बीज आदि का प्रयोग किया जाता है। इन्हीं
कारणों से भारत में गहन निर्वाह कृषि प्रचलित है।

(घ) स्थानांतरी-कृषि की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर―स्थानांतरी कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं―
(i) यह आदिम प्रकृति का कृषि कार्य है।

(ii) इस कृषि में वन प्रदेश में पेड़ों को काटकर व घास और झाड़ियों
को जलाकर खेत तैयार किया जाता है।

(iii) राख को मिट्टी में मिलाकर बीजों की बुआई की जाती है।

(iv) फावड़ा, हल, कुदाल आदि प्राथमिक कृषि यंत्रों का प्रयोग किया
जाता है।

(v) तीन-चार साल फसल उगाने के बाद उसे (खेत) छोड़ दिया जाता
है और फिर से नए खेत तैयार किये जाते हैं।

(vi) इस प्रकार की खेती से वनोन्मूलन मृदा अपरदन और मृदा की
गुणवत्ता की कमी समस्याएँ बढ़ती है।

(ङ) मिश्रित-कृषि से आप क्या समझते हैं ? यह किन देशों
में प्रचलित हैं?
उत्तर―वैसी कृषि जिसमें फसल के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारे
का भी उत्पादन किया जाता है, अर्थात् कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी
किया जाता है, मिश्रित कृषि कहलाता है। यही वाणिज्यिक-कृषि का एक
प्रकार है। इस प्रकार की कृषि मुख्यतः विकसित देश जैसे संयुक्त राज्य
अमेरिका, अर्जेन्टीना, दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवं दक्षिण अफ्रीका
में प्रचलित है। यह शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान में की जाती है।

(च) गेहूँ उत्पादन की भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर―गेहूँ के उत्पादन के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाओं की
आवश्यकता होती है―
(i) तापमान– 16-250 सेमी०, वर्धन काल में कम लेकिन फसल
पकते समय अधिक तापमान उपयुक्त होता है।

(ii) वर्षा– 50-100 सेमी० वर्षा के अभाव में हल्की सिंचाई।

(iii) भूमि– सुप्रवाहित।

(iv) मृदा– दोमट व चेरनोजेम मृदा।

(v) उत्तम बीज– उत्तम बीज, उर्वरक, कृषि यंत्र व उपकरण, सिंचाई
आदि।

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