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      Jharkhand Board Class 6TH Sanskrit Notes | यर्था कर्म तथा फलम्  

    JAC Board Solution For Class 6TH Sanskrit Chapter 11


                                       पाठ का सारांश

पाठः ― अहं सम्यक्तया उपचारं कर्तुम् अक्षमः । अतः ग्रामे कार्य न
मिलति ।
अर्थ― मैं अच्छी तरह उपचार करने के लिए असमर्थ हूँ। इसलिए गाँव
में काम नहीं मिलता है।

पाठः― यदि एष सर्पः कमपि बालं दंशेत् तर्हि चिकित्सां कृत्वा अधिकं धनं
प्राप्तुं शक्नोमि । बालाः! यदि कोऽपि शुकं स्वीकर्तुम् इच्छति चेत्
मम समीपे आगच्छ।
    अर्थ― यदि यह साँप किसी बालक को डसे तो इलाज पर अधिक धन
प्राप्त कर सकता हूँ। बच्चों । यदि कोई भी तोता को पाने के लिए
चाहता है तो मेरे पास आओ।

पाठः― यदि शुकम् इच्छसि तर्हि वृक्षस्य कोटरात् तं निष्कासया शीघ्र गच्छ
अन्यथा सः पलायनं करिष्यति ।
      अर्थ― यदि तोता चाहते हो तो पेड़ के खोड़र से उसको निकालो । शीघ्र
जाओ अन्यथा वह भाग जाएगा।

पाठ:― अहो! इत: निष्कासनीयम्। सम्प्रति सर्पस्य दंशनेन बाल: मूर्छितः
भविष्यति। पुनः अहं स्वचिकित्सया तं स्वस्थं कृत्वा धनं प्राप्यामि।
    अर्थ― यहाँ से निकालने योग्य है । अब साँप के डसने से बालक मूछित
होगा। फिर मैं अपने इलाज से उसको स्वस्थ कर धन प्राप्त
करूँगा।

पाठः― अहो! एषः तु सर्पः। एतं क्षिपामि। एषः तु सर्पस्य कण्ठं धृत्वा
निष्कासयति। सुरक्षितः अपि तिष्ठति।
    अर्थ― है । यह तो साँप है । इसको फेंकता हूँ। यह तो साँप के कंठ को
पकड़कर निकालता है। सुरक्षित भी है।

पाठः― अहो! सः तु सर्प मम मस्तके अक्षिपत्। हे प्रभो मां रक्षया आह!
रक्षय! रक्षय!
    अर्थ― है। उसने तो साँप को मेरे सिर पर फेंक दिया । हे प्रभु मेरी रक्षा
करें। आह! रक्षा करो रक्षा करें।

पाठ:― सत्यम् उक्तं केनचित्―
           यथा कर्म तथा फलम् ।
अर्थ― किसी के द्वारा सत्य कहा गया है-जैसा कर्म वैसा फल मिलता
है।

                                   अभ्यासः

प्रश्न संख्या 1 शब्दार्थ है।
2. (क) बालकः किं स्वीकर्तुम् इच्छति ?
(ख) बालः कुतः शुकं निष्कासयितुं गच्छति ?
(ग) कोटरे कः आसीत् ?
(घ) बालकः कस्य कण्ठं धृत्वा अक्षिपत् ?
(ङ) सर्पः कुत्र अपतत् ?
उत्तर― (क) बालकः शुकं स्वीकर्तुम इच्छति।
(ख) बाल वृक्षकोटरात् शुकं निष्कासयितुं गच्छति।
(ग) कोटरे सर्पः आसीत्।
(घ) बालकः सर्पस्य कण्ठं धृत्वा अक्षिपत्।
(ङ) सर्पः मस्तके अपतत्।

3. अधोलिखितानां पदानां समुचितान् अर्थान् मेलयत―
अ                                   आ
सम्यक्                            शिरसि
शीघ्रम्                             चिकित्सा
उत्पतिष्यति                     अचेतः
वदतु                               सुष्टु
मूर्च्छितः                          क्षिप्रम्
उपचारम्                         कथयतु
मस्तके                            उड्डीष्यति
(ख) मिथ्या
उत्तर― सम्यक्                   सुष्ठु
शीघ्रम्                               क्षिप्रम
उत्पतिष्यति                       उड्डीष्यति
वदतु                                 कथयतुं
मूर्छितः                              अचेत:
उपचारम्                           चिकित्सा
मस्तके                              शिरसि

4. मञ्जूषातः उचितं विलोमपदं चित्वा लिखत―
स्वीकर्तुम्    सुरक्षितः   अधिकम्   ग्रामे   सत्यम्
(क) अस्वीकर्तुम् ........................।
मिथ्या .........................।
(ग) नगरे........................।
(घ) न्यूनम् .....................।
(ङ) असुरक्षितः .................।
उत्तर― (क) स्वीकर्तुम्
(ख) सत्यम्
(ग) ग्रामे
(घ) अधिकम्
(ङ) सुरक्षितः

5. निर्देशानुसारं कालपरिवर्तनं कुरुत―
यथा― रामः गृहं गच्छति । (भविष्यत्काले) रामः गृहं गभिष्यति ।
(क) वैद्यः उपचारं करोति । (भविष्यत्काले)। ..................
(ख) अहं धनं प्राप्नोमि। (आज्ञार्थ)।         ..................
(ग) बालकः मूर्च्छितः भविष्यति। (वर्तमान काले)। ..............
(घ) रमा फलं खादति। (भविष्यकाले)।         ......................
(ङ) शुकः उत्पतति। (आज्ञार्थे)।           .........................
उत्तर―(क) वैद्यं उपचारं करिष्यति ।
(ख) अहं धनं प्राप्नोनि ।
(ग) बालक: मूर्च्छितः भवति ।
(घ) रमा फलं खादिष्यति ।
(ङ) शुक: उत्पततु ।

6. अधोलिखितानि वाक्यानि घटनाक्रमानुसारं लिखत―
(क) अहं शुकं स्वीकर्तुम् इच्छामि ।
(ख) युष्मासु कोऽपि शुकं स्वीकर्तुम् इच्छति ?
(ग) वदतु किं करणीयम्।
(घ) अहो! इतः निष्कासनीयम् ।
(ङ) हे प्रभो! मम रक्षय ।
(च) अहो! एषः तु सर्पस्य कण्ठं धृत्वा निष्कासयति ।
उत्तर― (क) युष्मासु कोऽपि शुकं स्वीकर्तुम् इच्छति ?
(ख) वदतु किं करणीयम् ?
(ग) अहं शुकं स्वीकर्तुम् इच्छामि।
(घ) अहो! इत: निष्कासीनयम्।
(ङ) अहो! एषः तु सर्पस्य कण्ठं धृत्वा निष्कासयति।
(च) हे प्रभो! मम रक्षय।

7. मञ्जूषातः उचितम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत।
अहो,   च,   यथा,  एक,   च
(क) ............... इतः निष्कासनीयम् ।
(ख) पिकः काकः............. कृष्णः भवति।
(ग) जलम् ................. जीवनम् ।
(घ) रामः मोहनः ..................... क्रीडाक्षेत्रे क्रीडतः।
(ङ) .................... राजा तथा प्रजा।
उत्तर― (क) अहो!
(ख) च
(ग) एव
(घ) च
(ङ) यथा

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