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 Jharkhand Board Class 10  Geography  Notes | खनिज तथा ऊर्जा संसाधन      

JAC Board Solution For Class 10TH ( Social science ) Geography Chapter 4

                    (Minerals and Energy Resources)

प्रश्न 1. खनिज क्या है?
उत्तर―खनिज प्राकृतिक रासायनिक यौगक हैं, जो संरचना और संघटन में
समान होते हैं। प्रकृति में ये चट्टानों एवं अयस्कों के घटक के रूप में उपस्थित
होते हैं। खनिजों की उत्पत्ति पृथ्वी के अन्दर विभिन्न भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के
द्वारा होती है। सभी खनिज निर्जीव पदार्थ होते हैं।

प्रश्न 2. झारखण्ड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में किस खनिज का
अग्रणी उत्पादक हैं?
(क) बॉक्साइट
(ख) अप्रक
(ग) लौह अयस्क
(घ) ताँबा
उत्तर―(ख) अभ्रक

प्रश्न 3. निम्नलिखित चट्टानों में से किस घट्टान के स्तरों में खनिजों का
निक्षेपण और संचयन होता है?
(क) तलछटी चट्टानें
(ख) कायंतरित चट्टानें
(ग) आग्रेय चट्टानें
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर―(क) तलछटी चट्टानें

प्रश्न 4. मोनजाइट रेत में पाये जाने वाले खनिज के नाम लिखें।
उत्तर―थोरियम।

प्रश्न 5. प्रमुख ऊर्जा खनिज कौन-कौन से हैं ?
उत्तर―प्रमुख ऊर्जा खनिज―
(i) कोयला 
(ii) पेट्रोलियम 
(iii) प्राकृतिक गैस ।

प्रश्न 6. किस ऊर्जा खनिज को 'काला सोना' कहा जाता है?
उत्तर―'कोयले को काला' सोना कहा जाता है।

प्रश्न 7. उन दो राज्यों के नाम बताएँ जहाँ कोयले के सबसे बड़े भंडार
हैं?
उत्तर―झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में कोयले सबसे बड़े भंडार स्थित है।

प्रश्न 8. भारत में दो तेल क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर―भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र निम्नलिखित हैं―
(i) मुंबई हाई 
(ii) असम

प्रश्न 9.लौह अयस्क उत्पादन के लिए प्रसिद्ध दो राज्य कौन-से हैं ?
उत्तर―लौह अयस्क उत्पादक राज्य―
(i) झारखण्ड । 
(ii) उड़ीसा ।

प्रश्न 10. बॉक्साइट किस धातु का अयस्क है?
उत्तर―बॉक्साइड एल्युमिनयिम धातु का अयस्क हैं।

प्रश्न 11. लौह खनिज तथा अलौह खनिज में अन्तर बताइए।
अथवा, लौह खनिज तथा अलौह खनिज का एक-एक उदाहरण
दीजिए।
उत्तर―लोह खनिज                                    अलौह खनिज
(i) लौह खनिजों में कठोरता पायी           (i) अलौह खनिजों में कठोरता नहीं
जाती है।                                                पायी जाती है।
(ii) लौह खनिज प्रायः भूरे रंग के          (ii) अलौह खनिज कई रंगों के होते
के होते हैं।                                               हैं।
(iii) उदाहरण–लोहा, मैगनीज,            (iii) उदाहरण–जस्ता, सीसा, सोना,
बॉक्साइट आदि लौह खनिज                       अभ्रक आदि अलौह खनिजों
के उदाहरण हैं।                                          के उदाहरण हैं।

प्रश्न 12. भारत की प्रमुख लौह अयस्क पेटियों का नाम लिखें।
अथवा, भारत के चार महत्त्वपूर्ण लौह उत्पादक राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर―भारत की प्रमुख लौह अयस्क पेटियाँ―
(i) उड़ीसा–झारखण्ड पेटी
(ii) दुर्ग–बस्तर चंद्रपुर पेटी।
(iii) बेलारी-चित्रदुर्ग-चिकमंगलूर-तुमकुर पेटी।
(iv) महाराष्ट्र–गोआ पेटी।

                           खनिजों का संरक्षण

प्रश्न 1. हमें खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों हैं?
उत्तर―खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से हैं―
(i) खनिजों के भंडार सीमित हैं।
(ii) खनिज अनवीकरणीय संसाधन हैं अर्थात एक बार समाप्त हो जाने के
बाद उनके निर्माण में लाखें वर्ष लग जाते हैं।
(iii) वर्तमान में खनिजों का चरम दोहन किया जा रहा है, जिसके कारण
उनके शीघ्र समाप्त हो जाने की संभावना बनी हुई है। इससे आगे आने वाली
पीढ़ी खनिजों के उपयोग से वंचित हो जायेगी।

                         ऊर्जा संसाधन
                                
प्रश्न 2. ऊर्जा के परंपरागत तथा गैर-परंपरागत स्त्रोतों में अंतर बताइए।
उत्तर―
लौह खनिज                                         अलौह खनिज
(i) परंपरागत ऊजा के स्रोत            (i) गैर-परंपरागत ऊजा के स्रोत
कभी-भी समाप्त हो सकते                   कभी-भी समाप्त नहीं हो
हैं।                                                    सकते हैं।
(ii) ये अधिक महंगे होते हैं।              (ii) ये सस्ते होते हैं।
(iii) ये प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।          (iii) ये प्रदूषण उत्पन्न नहीं करते है।
(iv) कोयला, पेट्रोलियम, परमाणु       (iv) पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ज्वारीय
शक्ति आदि परंपरागत                             ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा आदि
स्रोत के उदाहरण हैं।                               गैर-परंपरागत स्रोत के उदाहरण हैं।

प्रश्न 2. परंपरागत ऊर्जा के दो स्त्रोतों के नाम लिखें।
उत्तर―कोयला, पेट्रोलियम, परमाणु ऊर्जा तथा प्राकृतिक गैस आदि ।

प्रश्न 3. गैर-पारंपरिक ऊर्जा के प्रमख स्त्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर―गैर वाणिज्यिक ऊर्जा के स्त्रोत हैं- पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय
ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, कचरे उतपन्न ऊर्जा, गोबर गैस आदि ।

प्रश्न 4. जवारीय ऊर्जा किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर―गैर-पारंपरिक ऊर्जा।

प्रश्न 5. भारत में कोयले के वितरण पर प्रकाश डालें ।
उत्तर―एन्थ्रासाइट तथा बिटुमिनस उच्च कोटि के कोयला माने जाते हैं
क्योंकि इनमें कार्बन का प्रतिशत अधिक होता है। इनके जलने से धुंआ कम
निकलता है।
     एन्थ्रासाइट जम्मू एवं कश्मीर में पाया जाता है।
बिटुमिनस गोंडवाना क्षेत्र-झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़,
मध्यप्रदेश में मिलता है।
लिग्नाइट मध्यम श्रेणी का कोयला है। इसे भूरा कोयला भी कहते हैं।
भारत के लिग्नाइट में कोयले की अपेक्षा राख का प्रतिशत कम होता है।
लिग्नाइट कोयला राजस्थान, तमिलनाडु, असम जम्मू-कश्मीर में मिलता है।
पीट सबसे निम्न कोटि का कोयला होता है। इसमें धुऔं अधिक और ताप
कम होता है। यह झारखण्ड एवं छत्तीसगढ़ में प्रमुखता से पाया जाता है।

प्रश्न 6. ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के उपाय बताइए।
उत्तर―ऊर्जा संसाधनों के सरंक्षण के उपाय―
(i) ऊर्जा संसाधनों के प्रयोग के विकल्प विकसित किए जाने चाहिए। 
(ii) ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। अतः जहाँ तक संभव हो सके ऊर्जा 
की बचत की जानी चाहिए।
(iii) गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों के प्रयोग को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 7. भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों? किन्हीं
पाँच कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर―भारत एक उष्ण कटिबंधीय देश है। यहाँ सौर ऊर्जा दोहन की
असीम संभावनाएँ है। भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है। क्योंकि―
(i) सूर्य का प्रकाश प्रकृति का एक मुफ्त उपहार है, इसलिए निम्नवर्ग के
लोग आसानी से सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकते हैं।

(ii) सौर ऊर्जा के प्रयोग से हम बहुत-सी विदेशी मुद्रा को बचा सकते हैं
जो तेल गैस के आयात के कारण हमें दूसरे देशों को देनी पड़ती हैं।

(iii) कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसों के स्रोत का हम एक ही बार
प्रयोग कर सकते हैं परन्तु सौर ऊर्जा का प्रयोग बारम्बार किया जा सकता है,
क्योंकि यह एक नवीकरण स्रोत हैं।

(iv) सौर ऊर्जा का प्रयोग खाना बनाने, पमप द्वारा जल निकालने, पानी गर्म
करने, दूध को कीटाणु रहित बनाने तथा सड़कों पर रोशनी आदि करने में कर
सकते हैं।

(v) देश में बेकार पड़े बंजर जमीनों एवं सुदूर इलाकों का व्यावसायिक
उपयोग सौर ऊर्जा संयत्र लगाने में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
इन कारणों से भारत सौर-ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी देश बनने की
ओर अग्रसर है।

                                                ◆◆◆

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